Friday, 10 October 2014

योजना आयोग


योजना आयोग


भारत का योजना आयोग, भारत सरकार की एक संस्था है जिसका प्रमुख कार्य पंचवर्षीय योजनायें बनाना है. इसके अतिरिक्त इसके अन्य कार्य हैं:

1. देश के संसाधनों का आकलन करना.
2. इन संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण करना.
3. प्राथमिकताओं का निर्धारण और योजनाओं के लिए संसाधनों का आवंटन करना.
4. योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक मशीनरी का निर्धारण करना.
5. योजनाओं की प्रगति का आवधिक मूल्यांकन करना.
6. देश के संसाधनों का सबसे प्रभावी और संतुलित ढंग से उपयोग करने के लिए योजनाओं का निर्माण करना.
7. आर्थिक विकास को बाधित करने वाले कारकों की पहचान करना.
8. योजना के प्रत्येक चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मशीनरी का निर्धारण करना.


नोट:

1. भारत में योजना आयोग के संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है.
2. 15 मार्च, 1950 ई० को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के द्वारा योजना आयोग की स्थापना की गई थी. योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है.

भारत के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाक की मलाला को शांति का नोबेल

भारत के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाक की मलाला को शांति का नोबेल

मलाला

1. मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ.
2. मलाला के पिता का नाम जियाउद्दीन युसुफजई हैं.
3. मलाला मिंगोरा शहर में आठवीं कक्षा की छात्रा है. मिंगोरा पर तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक कब्जा कर रखा था.
4. इसी बीच तालिबान के भय से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था. मलाला का संघर्ष यहीं से शुरू होता है.
5. वर्ष 2009 में मलाला ने अपने छद्म नाम 'गुल मकई' से बीबीसी के लिए एक डायरी लिखी. इसमें उसने स्वात में तालिबान के कुकृत्यों का वर्णन किया था.
6. मलाला यूसुफजई पर 9 अक्टूबर 2012 को तालिबान आतंकवादियों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में हमला किया था.
7. तालिबान हमले के बाद मलाला जब स्वस्थ हुई तो अंतरराष्‍ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार (2011) के अलावा कई बड़े सम्मान मलाला के नाम दर्ज होने लगे.
8. संयुक्त राष्ट्र की ओर से 12 जुलाई को मलाला दिवस भी घोषित किया गया.

कैलाश सत्‍यार्थी

1. कैलाश सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष हैं.
2. इसमें लगभग 80,000 स्वयंसेवक हैं, जो लगातार मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने में लगे रहते हैं.
3. अब तक 80 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी कैलाश सत्यार्थी ने बदली है.
4. 11 जनवरी 1954 को जन्मे कैलाश सत्यार्थी भोपाल गैस त्रासदी के राहत अभियान में भी इन्‍होंने जमकर काम किया.
5. 2009 में सत्‍यार्थी को डेफेंडर ऑफ डेमोक्रेसी अवॉर्ड (अमेरिका) मिला
6. 2008 में अलफांसो कोमिन इंटरनेशनल अवॉर्ड (स्‍पेन) इन्‍हें मिला
7. 2007 में मेडल ऑफ द इटालियन सेनाटे (Medal of the Italian Senate) सम्‍मान से नवाजे गए
8. 2006 में फ्रीडम अवॉर्ड (अमेरिका)
9. 2002 में वैलेनबर्ग मेडल, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन
10. 1999 में फ्राइड्रीच इबर्ट स्‍टीफटंग अवॉर्ड (जर्मनी)
11. 1995 में रॉबर्ट एफ. कैनेडी ह्यूमन राइट अवॉर्ड (अमेरिका)
12. 1985 में द ट्रमपेटेर अवॉर्ड (अमेरिका)
13. 1984 में द आचेनेर इंटरनेशनल पीस अवार्ड (जर्मनी)

Wednesday, 24 September 2014

Hearty congratulations & best wishes to ISRO Team on Mangalyaan's success

ISRO( ईसरो) के वैज्ञानिको को समस्त भारतवासियो की तरफ से बधाई हो


ISRO MOM (Mars Orbiter Mission )

इंडियन स्‍पेस रिसर्च आॅर्गनाइजेशन के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक बना गया। इसके द्वारा भेजा गया यान 65 करोड़ किमी का सफर करके मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्‍थापित हो गया। भारत पहली ही कोशिश में ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। दुनिया का कोई दूसरा देश पहली कोशिश में मंगल ग्रह पर भेजे मिशन में कामयाबी हासिल नहीं कर पाया है। अमेरिका तक की पहली 6 कोशिशें नाकाम रही हैं। इस मंगलयान की मदद से इसरो के वैज्ञानिक मंगल के वातावरण का अध्‍ययन कर सकेंगे। भविष्‍य में मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले मान‍व मिशन के लिए यह बेहद जरूरी है। मंगलयान की मदद से ग्रह की सतह और वहां मौजूद मिनरल्‍स का अध्‍ययन भी किया जाएगा। इसके अलावा, ग्रह पर पानी और मीथेन की मौजूूदगी की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा। पानी और मीथेन जीवन की संभावना स्‍थापित करने के लिए जरूरी है। बता दें कि मार्स ऑर्बिटर मिशन या मंगलयान को 1 दिसंबर को सतीश धवन स्‍पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा से लॉन्‍च किया गया था।

ऐसे हुआ मंगल फतह
मंगल की कक्षा में प्रवेश से पहले मंगलयान की गति कम कर दी गई थी। इसके साथ ही मंगलयान का रास्ता भी थोड़ा बदला गया। मंगल ग्रह की कक्षा में दाखिल होने से तीन घंटे पहले इसरो का यान कई अहम प्रक्रियाओं से गुजरा। इन प्रक्र‍ियाओं को पूरा करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों ने सारे कमांड 14 और 15 सितंबर को ही कम्‍प्‍यूटर में अपलोड कर दिए थे।

जानें, क्‍या हैं वह प्रक्रियाएं और कितने बजे क्‍या हुआ

4:17:32
यान में लगा शक्‍त‍िशाली कम्‍युनिकेशन एंटीना शुरू हुआ।

6:56:32
स्‍पेसक्राफ्ट में फॉरवर्ड रोटेशन शुरू हुआ।

7:12:19
स्‍पेसक्राफ्ट ने मंगल ग्रह की छाया में प्रवेश किया।

7:14: 32
यान में ऊंचाई को कंट्रोल करने के लिए थ्रस्‍टर्स फायर किए गए।

7:17:32
मुख्य इंजन चालू हुआ।

7:21:50
मंगल ग्रह के बीच में आने की वजह से स्‍पेसक्राफ्ट दिखना बंद हो गया। साथ में यान से सिग्‍नल मिलने भी बंद।

7:22:32
यान का कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम पूरी तरह बंद।

7:30:02
इंजन के चालू होने की पुष्टि हुई।

7:37:01
मंगल ग्रह की छाया से बाहर निकला यान।

7:41:46
इंजन बंद हुआ। (करीब 249.5 किलो फ्यूल जलने के बाद)

7:45:10
सभी प्रक्रियाएं पूरी।

7:47:46
यान से दोबारा संपर्क कायम हुआ।




                                           Mars Orbiter Mission क्‍या है मिशन

मंगल ग्रह की परिधि में 1350 किलो वजन वाले यान को स्‍थापित करना। इसके बाद ग्रह की सतह और वहां मिनरल्‍स का अध्‍ययन किया जाएगा। भविष्‍य में मंगल ग्रह के लिए मानव मिशन शुरू करने के लिए भी जानकारी जुटाई जाएगी। वहां के वातावरण में मीथेन की मौजूदगी का अध्‍ययन किया जाएगा। यान को 1 दिसंबर को सतीश धवन स्‍पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा से लॉन्‍च किया गया था।

क्‍या है लागत

मिशन की लागत करीब‍ 400 करोड़ रुपए है। हाल ही में इसरो के एक लॉन्‍च कार्यक्रम में शामिल हुए पीएम मोदी ने कहा था कि हमारे मंगल मिशन की लागत हॉलीवुड फिल्‍म 'ग्रैविटी' को बनाने में आए खर्च से भी कम है। बता दें कि 'ग्रैविटी' फिल्‍म को बनाने में करीब 600 करोड़ रुपए का खर्च आया था। वहीं, अमेरिकी मंगल मिशन मैवेन की बात करें तो इसमें 4 हजार करोड़ से ज्‍यादा का खर्च आया है।

और कितने देशों ने शुरू किए मंगल मिशन

अभी तक मंगल ग्रह को लेकर 51 मिशन शुरू किए जा चुके हैं। हालांकि, इस संख्‍या में भारत के नासा के हालिया मिशन को शामिल नहीं किया गया है। इनमें से सिर्फ 26 ही कामयाब हुए हैं। मंगल ग्रह के लिए पहला सफल मिशन अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा का मरीनर 9 था। यह यान मंगल की कक्षा में 13 नवंबर, 1971 को दाखिल हुआ था। आखिरी सफल मिशन का श्रेय भी नासा को है। यह उपलब्‍धि‍ उसे 2006 में मिली। मंगल के असफल मिशनों की बात करें, तो सबसे हालिया वाकया नवंबर 2011 में हुआ। चीनी यान यिंगहुओ-1 पृथ्‍वी के वातावरण से बाहर जाने में ही कामयाब नहीं हो सका।


Friday, 5 September 2014

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Sarvepalli Radhakrishnan)

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( ५ सितम्बर १८८८ – १७ अप्रैल १९७५) भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (१९५२ - १९६२) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनका जन्म दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान में हुआ था जो चेन्नई से ६४ किमी उत्तर-पूर्व में है। उनका जन्मदिन (५ सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। उनके इन्हीं गुणों के कारण सन् १९५४ में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था।

संक्षिप्त परिचयवृत्त

सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय सामाजिक संस्कृति से ओतप्रोत एक प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक, उत्कृष्ट वक्ता और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थे। वे स्वतन्त्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। इससे पूर्व वे उपराष्ट्रपति भी रहे। राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण ४० वर्ष शिक्षक के रूप में व्यतीत किये थे। उनमें एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण मौजूद थे। उन्होंने अपना जन्म दिन अपने व्यक्तिगत नाम से नहीं अपितु सम्पूर्ण शिक्षक बिरादरी को सम्मानित किये जाने के उद्देश्य से शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी जिसके परिणामस्वरूप आज भी सारे देश में उनका जन्म दिन (5 सितम्बर) को प्रति वर्ष शिक्षक दिवस के नाम से ही मनाया जाता है।

डॉ० राधाकृष्णन समस्त विश्व को एक शिक्षालय मानते थे। उनकी मान्यता थी कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जाना सम्भव है। इसीलिए समस्त विश्व को एक इकाई समझकर ही शिक्षा का प्रबन्धन किया जाना चाहिये। एक बार ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए उन्होंने कहा था कि मानव की जाति एक होनी चाहिये। मानव इतिहास का सम्पूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है। यह तभी सम्भव है जब समस्त देशों की नीतियों का आधार विश्व-शान्ति की स्थापना का प्रयत्न करना हो। वे अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं, आनन्ददायी अभिव्यक्तियों और हँसाने व गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मन्त्रमुग्ध कर दिया करते थे। वे छात्रों को प्रेरित करते थे कि वे उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारें। वे जिस विषय को पढ़ाते थे, पढ़ाने के पहले स्वयं उसका अच्छा अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गम्भीर विषय को भी वे अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक बना देते थे।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनायी जाती है। इन दिनों जब शिक्षा की गुणात्मकता का ह्रास होता जा रहा है और गुरु-शिष्य सम्बन्धों की पवित्रता को ग्रहण लगता जा रहा है, उनका पुण्य स्मरण फिर एक नयी चेतना पैदा कर सकता है। सन्‌ 1962 में जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब कुछ शिष्य और प्रशंसक उनके पास गये और उन्होँने उनसे निवेदन किया कि वे उनके जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा- "मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से निश्चय ही मैं अपने को गौरवान्वित अनुभव करूँगा।" तबसे आज तक 5 सितम्बर सारे देश में उनका जन्म दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राधाकृष्णन ने जो अमूल्य योगदान दिया वह निश्चय ही अविस्मरणीय रहेगा। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। यद्यपि वे एक जाने-माने विद्वान, शिक्षक, वक्ता, प्रशासक, राजनयिक, देशभक्त और शिक्षा शास्त्री थे, तथापि अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में अनेक उच्च पदों पर काम करते हुए भी वे शिक्षा के क्षेत्र में सतत योगदान करते रहे। उनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाये तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया जा सकता है।

डॉ० राधाकृष्णन कहा करते थे कि मात्र जानकारियाँ देना शिक्षा नहीं है। यद्यपि जानकारी का अपना महत्व है और आधुनिक युग में तकनीक की जानकारी महत्वपूर्ण भी है तथापि व्यक्ति के बौद्धिक झुकाव और उसकी लोकतान्त्रिक भावना का भी बड़ा महत्व है। ये बातें व्यक्ति को एक उत्तरदायी नागरिक बनाती हैं। शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरन्तर सीखते रहने की प्रवृत्ति। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान करती है तथा इनका जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है। करुणा, प्रेम और श्रेष्ठ परम्पराओं का विकास भी शिक्षा के उद्देश्य हैं।

वे कहते थे कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होता और शिक्षा को एक मिशन नहीं मानता तब तक अच्छी शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने अनेक वर्षोँ तक अध्यापन किया। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। उनका कहना था कि शिक्षक उन्हीं लोगों को बनाया जाना चाहिये जो सबसे अधिक बुद्धिमान हों। शिक्षक को मात्र अच्छी तरह अध्यापन करके ही सन्तुष्ट नहीं हो जाना चाहिये अपितु उसे अपने छात्रों का स्नेह और आदर भी अर्जित करना चाहिये। सम्मान शिक्षक होने भर से नहीं मिलता, उसे अर्जित करना पड़ता है।

उनकी मृत्यु १७ अप्रैल १९७५ को हुई थी ।


Thursday, 14 August 2014

भारत का ध्वज (Flag of India)


                                                                भारत का ध्वज (Flag of India)


भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी। इसे १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व २२ जुलाई, १९४७ को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था। इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं , जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात २:३ है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है जिसमें २४ अरे होते हैं। इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है व रूप सम्राट अशोक की राजधानी सारनाथ में स्थित स्तंभ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह होता है।

सरकारी झंडा निर्दिष्टीकरण के अनुसार झंडा खादीमें ही बनना चाहिए। यह एक विशेष प्रकार से हाथ से काते गए कपड़े से बनता है जो महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय बनाया था। इन सभी विशिष्टताओं को व्यापक रूप से भारत में सम्मान दिया जाता हैं भारतीय ध्वज संहिता के द्वारा इसके प्रदर्शन और प्रयोग पर विशेष नियंत्रण है। ध्वज का हेराल्डिक वर्णन इस प्रकार से होता है:

परिचय

अशोक चक्र
गांधी जी ने सबसे पहले 1921 में कांग्रेस के अपने झंडे की बात की थी। इस झंडे को पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। इसमें दो रंग थे लाल रंग हिन्दुओं के लिए और हरा रंग मुस्लिमों के लिए। बीच में एक चक्र था। बाद में इसमें अन्य धर्मो के लिए सफेद रंग जोड़ा गया। स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ दिन पहले संविधान सभा ने राष्ट्रध्वज को संशोधित किया। इसमें चरखे की जगह अशोक चक्र ने ली। इस नए झंडे की देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने फिर से व्याख्या की।

21 फीट गुणा 14 फीट के झंडे पूरे देश में केवल तीन किलों के ऊपर फहराए जाते हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित किला उनमें से एक है। इसके अतरिक्त कर्नाटक का नारगुंड किले और महाराष्ट्र का पनहाला किले पर भी सबसे लम्बे झंडे को फहराया जाता है।

1951 में पहली बार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने पहली बार राष्ट्रध्वज के लिए कुछ नियम तय किए। 1968 में तिरंगा निर्माण के मानक तय किए गए। ये नियम अत्यंत कड़े हैं। केवल खादी या हाथ से काता गया कपड़ा ही झंडा बनाने के लिए उपयोग किया जाता है । कपड़ा बुनने से लेकर झंडा बनने तक की प्रक्रिया में कई बार इसकी टेस्टिंग की जाती है। झंडा बनाने के लिए दो तरह की खादी का प्रयोग किया जाता है। एक वह खादी जिससे कपड़ा बनता है और दूसरा खादी-टाट। खादी के केवल कपास, रेशम और ऊन का प्रयोग किया जाता है। यहां तक की इसकी बुनाई भी सामन्य बुनाई से भिन्न होती है। ये बुनाई बेहद दुर्लभ होती है। इसे केवल पूरे देश के एक दर्जन से भी कम लोग जानते हैं। धारवाण के निकट गदग और कर्नाटक के बागलकोट में ही खादी की बुनाई की जाती है। जबकी '''हुबली''' एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जहां से झंडा उत्पादन व आपूर्ति की जाती है। बुनाई से लेकर बाजार में पहुंचने तक कई बार बीआईएस प्रयोगशालाओं में इसका परीक्षण होता है।बुनाई के बाद सामग्री को परीक्षण के लिए भेजा जाता है। कड़े गुणवत्ता परीक्षण के बाद उसे वापस कारखाने भेज दिया जाता है। इसके बाद उसे तीन रंगो में रंगा जाता है। केंद्र में अशोक चक्र को काढ़ा जाता है। उसके बाद इसे फिर परीक्षण के लिए भेजा जाता है। बीआईएस झंडे की जांच करता है इसके बाद ही इसे बाजार में बेचने के लिए भेजा जाता है।

                                                 तिरंगे का विकास

यह ध्वज भारत की स्वतंत्रता के संग्राम काल में निर्मित किया गया था। १८५७में स्वतंत्रता के पहले संग्राम के समय भारत राष्ट्र का ध्वज बनाने की योजना बनी थी, लेकिन वह आंदोलन असमय ही समाप्त हो गया था और उसके साथ ही वह योजना भी बीच में ही अटक गई थी। वर्तमान रूप में पहुंचने से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय ध्वज अनेक पड़ावों से गुजरा है। इस विकास में यह भारत में राजनैतिक विकास का परिचायक भी है। कुछ ऐतिहासिक पड़ाव इस प्रकार हैं :-

प्रथम चित्रित ध्वज १९०४ में स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा बनाया गया था।]७ अगस्त, १९०६ को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में इसे कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे और नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चाँद बनाए गए थे। बीच की पीली पट्टी पर वंदेमातरम् लिखा गया था।

द्वितीय ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और १९०७ में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। कुछ लोगों की मान्यता के अनुसार यह १९०५ में हुआ था। यह भी पहले ध्वज के समान था; सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर केवल एक कमल था, किंतु सात तारे सप्तऋषियों को दर्शाते थे। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

१९१७ में भारतीय राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया। डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान तृतीय चित्रित ध्वज को फहराया। इस ध्वज में ५ लाल और ४ हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्ततऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे। ऊपरी किनारे पर बायीं ओर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्तमान विजयवाड़ा) में किया गया यहाँ आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने एक झंडा बनाया (चौथा चित्र) और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्वं करता है। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

वर्ष १९३१ तिरंगे के इतिहास में एक स्मरणीय वर्ष है। तिरंगे ध्वज को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया और इसे राष्ट्र-ध्वज के रूप में मान्यता मिली। यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इसका कोई साम्प्रदायिक महत्त्व नहीं था।

२२ जुलाई १९४७ को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।




Wednesday, 13 August 2014

संवैधानिक धारा & अनुच्छेद



● भारतीय संविधान में कुल कितने अनुच्छेद हैं— 444


● भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में यह लिखा है कि भारत राज्यों का एक संघ होगा— अनुच्छेद-1


● किस अनुच्छेद में नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं— अनुच्छेद 12-35 

● किस अनुच्छेद में नागरिकता संबंधी प्रावधान है— अनुच्छेद 5-11

● नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थाओं में समाज के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को कौन-सा अनुच्छेद अधिकार प्रदान करता है— अनुच्छेद-16 

● संविधान के किस अनुच्छेद में राज्य में नीति-निर्देशक तत्वों का उल्लेख है— अनुच्छेद 36-51 

● भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा वर्णित है— अनुच्छेद-39

● संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत भारत में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जा सकता है—अनुच्छेद-61 

● किस अनुच्छेद में मंत्रिगण सामूहिक रुप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं— अनुच्छेद-75

● महान्यायवादी की नियुक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत की जाती है— अनुच्छेद-76 

● संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति लोकसभा भंग कर सकता है— अनुच्छेद-85

● किस अनुच्छेद में संसद के संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान है— अनुच्छेद-108 

● संविधान के किस अनुच्छेद में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है— अनुच्छेद-110 

● संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करता है— अनुच्छेद-123 

● संविधान के किस अनुच्छेद में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश पर महाभियोग चलाया जा सकता है—अनुच्छेद-124

● राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांग सकता है— अनुच्छेद-233

● किस अनुच्छेद के अंतर्गत केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियाँ है— अनुच्छेद-248

● किस अनुच्छेद में अंतर्राष्ट्रीय समझौते लागू करने के लिए शक्ति प्रदान की गई है— अनुच्छेद-253

● किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करता है— अनुच्छेद-280 

● संपत्ति का अधिकार किस अनुच्छेद में है— अनुच्छेद-300 (क) 


● संविधान के किस अनुच्छेद में संघ और राज्यों के लिए लोकसेवा आयोग का प्रावधान है—अनुच्छेद-315

● किस अनुच्छेद के अंतर्गत हिन्दी भाषा को राजकीय भाषा घोषित किया गया है— अनुच्छेद-343 (I)

● संविधान के किस अनुच्छेद के तहत अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग के गठन का प्रावधान है— अनुच्छेद-338 (A) 

● संसद को संविधान संशोधन का अधिकार किस अनुच्छेद में है— अनुच्छेद-368 

● संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत संविधान की प्रक्रिया का उल्लेख है— अनुच्छेद-356 

● संविधान के किस अनुच्छेद में ‘मंत्रिमंडल’ शब्द का प्रयोग संविधान में एक बार हुआ है—अनुच्छेद-352 

● जम्मू-कश्मीर को किस अनुच्छेद के अंतर्गत विशेष दर्जा प्राप्त है— अनुच्छेद-370

● अनुच्छेद-356 का संबंध किससे है— राष्ट्रपति शासन से 

● भारतीय संविधान में समानता का अधिकार पाँच अनुच्छेदों द्वारा प्रदान किया गया है, वे कौन-से हैं—अनुच्छेद-14-18

● संविधान के किस अनुच्छेद में मूल कर्तव्यों का उल्लेख है— अनुच्छेद-51 (क) 

● ‘भारत के नागरिक का कर्तव्य होगा प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण एवं सुधार’ यह कथन किस अनुच्छेद में है— अनुच्छेद-(A) 

● संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राज्य सरकार को ग्राम पंचायत के संगठन का निर्देश दिया गया है— अनुच्छेद-40

● वर्तमान में संविधान में कितनी अनुसूचियाँ हैं— 12

● संविधान की द्वितीय अनुसूची का संबंध किस से है— महत्वपूर्ण पद अधिकारियों के वेतन-भत्तों से 

● कौन-सी अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है— आठवीं अनुसूची 


● दल-बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता संबंधी विवरण किस अनुसूची में है— 10वीं अनुसूची 

● संविधान की छठी अनुसूची किस राज्य में लागू नहीं होता है— मणिपुर 

● किस राज्य के आरक्षण विधेयक को 9वीं अनुसूची में सम्मिलिति किया गया है— तमिलनाडु 

● भारतीय संविधान की कौन-सी अनुसूची राज्य में नामों की सूची तथा राज्य क्षेत्रों का ब्यौरा देती है—पहली अनुसूची 

● भारतीय संविधान में 9वीं अनुसूची परिवर्तित हुई— प्रथम संशोधन द्वारा 

● किस अनुच्छेद के अंतर्गत उपराष्ट्रपति पद की व्यवस्था है— अनुच्छेद-63

● वित्तीय आपात की घोषणा किस अनुच्छेद के अंतर्गत होती है— अनुच्छेद-360 

● राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया जाता है— अनुच्छेद-340 

● किस अनुसूची में केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे का वर्णन है— सातवीं अनुसूची में 

● समवर्ती सूची किस राज्य में संबंधित नहीं है— जम्मू-कश्मीर से 

● संविधान लागू होने के समय समवर्ती सूची में कितने विषय थे— 47 विषय 

● वर्तमान में राज्य सूची में कितने विषय हैं— 66 विषय 

● वर्तमान में संघ सूची में कितने विषय हैं— 97 विषय 

● किस अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा व मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान है— छठीं अनुसूची में

भारतीय संविधान के संशोधन



● पहला संशोधन (1951) —इस संशोधन द्वारा नौवीं अनुसूची को शामिल किया गया।


● दूसरा संशोधन (1952) —संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व को निर्धारित किया गया।


● सातवां संशोधन (1956) —इस संशोधन द्वारा राज्यों का अ, ब, स और द वर्गों में विभाजन समाप्त कर उन्हें 14 राज्यों और 6 केंद्रशासित क्षेत्रों में विभक्त कर दिया गया।


● दसवां संशोधन (1961) —दादरा और नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल कर उन्हें संघीय क्षेत्र की स्थिति प्रदान की गई।


● 12वां संशोधन (1962) —गोवा, दमन और दीव का भारतीय संघ में एकीकरण किया गया।


● 13वां संशोधन (1962) —संविधान में एक नया अनुच्छेद 371 (अ) जोड़ा गया, जिसमें नागालैंड के प्रशासन के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए। 1दिसंबर, 1963 को नागालैंड को एक राज्य की स्थिति प्रदान कर दी गई।


● 14वां संशोधन (1963) —पांडिचेरी को संघ राज्य क्षेत्र के रूप में प्रथम अनुसूची में जोड़ा गया तथा इन संघ राज्य क्षेत्रों (हिमाचल प्रदेश, गोवा, दमन और दीव, पांडिचेरी और मणिपुर) में विधानसभाओं की स्थापना की व्यवस्था की गई।


● 21वां संशोधन (1967) —आठवीं अनुसूची में ‘सिंधी’ भाषा को जोड़ा गया।


● 22वां संशोधन (1968) —संसद को मेघालय को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित करने तथा उसके लिए विधानमंडल और मंत्रिपरिषद का उपबंध करने की शक्ति प्रदान की गई।


● 24वां संशोधन (1971) —संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन का अधिकार दिया गया।


● 27वां संशोधन (1971) —उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र के पाँच राज्यों तत्कालीन असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर व त्रिपुरा तथा दो संघीय क्षेत्रों मिजोरम और अरुणालच प्रदेश का गठन किया गया तथा इनमें समन्वय और सहयोग के लिए एक ‘पूर्वोत्तर सीमांत परिषद्’ की स्थापना की गई।


● 31वां संशोधन (1974) —लोकसभा की अधिकतम सदंस्य संख्या 547 निश्चित की गई। इनमें से 545 निर्वाचित व 2 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होंगे।


● 36वां संशोधन (1975) —सिक्किम को भारतीय संघ में संघ के 22वें राज्य के रूप में प्रवेश प्रदान किया गया।


● 37वां संशोधन (1975) —अरुणाचल प्रदेश में व्यवस्थापिका तथा मंत्रिपरिषद् की स्थापना की गई।


● 42वां संशोधन (1976) —इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) की संज्ञा प्रदान की गई है।


—इसके द्वारा संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘समाजवादी’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए।
—इसके द्वारा अधिकारों के साथ-साथ कत्र्तव्यों की व्यवस्था करते हुए नागरिकों के 10 मूल कर्त्तव्य निश्चित किए गए।
—लोकसभा तथा विधानसभाओं के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि की गई।
—नीति-निर्देशक तत्वों में कुछ नवीन तत्व जोड़े गए।
—इसके द्वारा शिक्षा, नाप-तौल, वन और जंगली जानवर तथा पक्षियों की रक्षा, ये विषय राज्य सूची से निकालकर समवर्ती सूची में रख दिए गए।
—यह व्यवस्था की गई कि अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आपातकाल संपूर्ण देश में लागू किया जा सकता है या देश के किसी एक या कुछ भागों के लिए।
—संसद द्वारा किए गए संविधान संशोधन को न्यायालय में चुनौती देने से वर्जित कर दिया गया।


● 44वां संशोधन (1978) —संपत्ति के मूलाधिकार को समाप्त करके इसे विधिक अधिकार बना दिया गया।
—लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि पुनः 5 वर्ष कर दी गई।
—राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष्ज्ञ के चुनाव विवादों की सुनवाई का अधिकार पुनः सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय को ही दे दिया गया।
— मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को जो भी परामार्श दिया जाएगा, राष्ट्रपति मंत्रिमंडल को उस पर दोबारा विचार करने लिए कह सकेंगे लेकिन पुनर्विचार के बाद मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को जो भी परामर्श देगा, राष्ट्रपति उस परामर्श को अनिवार्यतः स्वीकार करेंगे।
—‘व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार’ को शासन के द्वारा आपातकाल में भी स्थगित या सीमित नहीं किया जा सकता, आदि।


● 52वां संशोधन (1985) —इस संशेधन द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके द्वारा राजनीतिक दल-बदल पर कानूनी रोक लगाने की चेष्टा की गई है।


● 55वां संशोधन (1986) —अरुणाचल प्रदेश को भारतीय संघ के अन्तर्गत राज्य की दर्जा प्रदान किया गया।


● 56वां संशोधन (1987) —इसमें गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा ‘दमन व दीव’ को नया संघीय क्षेत्र बनाने की व्यवस्था है।


● 61वां संशोधन (1989) —मताधिकार के लिए न्यूनतम आवश्यक आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।


● 65वां संशोधन (1990) —‘अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग’ के गठन की व्यवस्था की गई।


● 69वां संशोधन (1991) —दिल्ली का नाम ‘राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र दिल्ली’ किया गया तथा इसके लिए 70 सदस्यीय विधानसभा तथा 7 सदस्यीय मंत्रिमंडल के गठन का प्रावधान किया गया।




● 70वां संशोधन (1992) —दिल्ली तथा पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल करने का प्रावधान किया गया।


● 71वां संशोधन (1992) —तीन और भाषाओं कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया गया।


● 73वां संशोधन (1992) —संविधान में एक नया भाग 9 तथा एक नई अनुसूची ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई और पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।


● 74वां संशोधन (1993) —संविधान में एक नया भाग 9क और एक नई अनुसूची 12वीं अनुसूची जोड़कर शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।


● 91वां संशोधन (2003) —इसमें दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया गया।


● 92वां संशोधन (2003) —इसमें आठवीं अनुसूची में चार और भाषाओं-मैथिली, डोगरी, बोडो और संथाली को जोड़ा गया।


● 93वां संशोधन (2005) —इसमें एससी/एसटी व ओबीसी बच्चों के लिए गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया।


● 97वां संशोधन (2011) —इसमें संविधान के भाग 9 में भाग 9ख जोड़ा गया और हर नागरिक को कोऑपरेटिव सोसाइटी के गठन का अधिकार दिया गया।